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सोमवार, 11 जनवरी 2010

सरस्वती वंदना : ३ संजीव 'सलिल'

सरस्वती वंदना : ३


संजीव 'सलिल'


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हे हंसवाहिनी! ज्ञानदायिनी!

अम्ब विमल मति दे...

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नाद-ब्रम्ह की नित्य वंदना.

ताल-थापमय सृजन-साधना.

सरगम कंठ सजे...

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रुनझुन-रुनझुन नूपुर बाजे.

नटवर-चित्रगुप्त उर साजे.

रास-लास उमगे...

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अक्षर-अक्षर शब्द सजाये.

काव्य-छंद, रस-धार बहाये.

शुभ साहित्य सृजे...

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सत-शिव-सुन्दर सृजन शाश्वत.

सत-चित-आनंद भजन भागवत.

आत्म देव पुलके...

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कंकर-कंकर प्रगटे शंकर.

निर्मल करें ह्रदय प्रयलंकर.

'सलिल' सतत महके...

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बुधवार, 6 जनवरी 2010

सरस्वती वंदना : २ --संजीव 'सलिल'

सरस्वती वंदना : २

संजीव 'सलिल'

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हे हंसवाहिनी!, ज्ञानदायिनी!!

अम्ब विमल मति दे...

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जग सिरमौर बने माँ भारत.

सुख-सौभाग्य करे नित स्वागत.

नव बल-विक्रम दे...

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साहस-शील ह्रदय में भर दे.

जीवन त्याग-तपोमय कर दे.

स्वाभिमान भर दे...

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लव-कुश, ध्रुव-प्रह्लाद हम बनें.

मानवता का त्रास-तम हरें.

स्वार्थ विहँस तज दें...

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दुर्गा, सीता, गार्गी, राधा.

घर-घर हों, काटें हर बाधा.

सुख-समृद्धि सरसे...

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नेह-प्रेम की सुरसरि पावन.

स्वर्गोपम हो राष्ट्र सुहावन.

'सलिल' निरख हरषे...

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दिव्यनर्मदा.ब्लागस्पाट.कॉम

Acharya Sanjiv Salil

http://divyanarmada.blogspot.com/